2016 की कहानी देखे बिना हमने 2017 में देशद्रोही बना दिया फेसबुक पर देशप्रेम की मिसाल हम सब दे रहे है देशप्रेम का तो पता नही अपने घर के बाहर जो गन्दी नाली बह रही है जो असल में गन्दी है नही (पड़ोसी के घर के संडास से और मेरे घर के संडास से बह रहा पानी मात्र है ) कभी वो तो झाड़ू ले के साफ किया नही गया
इसकी वजह हम सबको पता है वो मैल जो हमारा अपना है उस नाली में जा मिला जिसमे और 4 घर का भी आता है तो हम में से कोई कैसे साफ करेगा ।
जाने दो एक बार मन में सोच के देखना की अपने घर के संडास को कितनी बार साफ किया है अगर किया है तो अच्छा है न किया हो तो कर के देखना अच्छा लगेगा या न भी लगे ।
ऐसा लगता होगा हाथ खराब हो जाएंगे शायद हो भी जाएँ न भी हो ।
वो गंदगी वो ही जो हमारी अपनी है उसे साफ करने के लिये वो ही हाथ और उसकी अंगुलियां चाहिये जो सोशल मीडिया पर सरपट
कमेंट करने के लिये चलती है .....
जाने दो हमसे न होगा
हम तो चले हैं देश प्रेम की झाड़ू लेकर social media पर मेरे पिता फ़ौज में नही है मगर मेरे घर से चन्द दुरी पे उनके घर है जो मेरे घर की सुरक्षा के लिये सोते नही नोकरी है उनकी ऐसा कहते है हम .... सब्जी बाजार में उसे सब्जी उसी दाम पे मिलती है जिस पर हमे ... दवा दारू राशन भी ज़िन्दगी उसकी भी उतनी ही जितनी मेरी बस उसकी मौत बन्दूक की गोली से होती है और मेरी बन्दूक के नाम भर से .....कुछ को शहर के धुआँ से दम घुटने से भी .... दर्द तो तभी पता चले जब 26 जनवरी 15 अगस्त के अलावा इनकी ज़िन्दगी में झांक ले हम (ये 2 दिन भारत के लिऐ खास है ये बात सोशल मीडिया पर पता चलती है बाजार में आने वाली सेल से भी )
आज एक फ़ौज के जवान से यूँ ही मुलाकात हुई ब्लड बैंक के बाहर खून देने आए थे अपने किसी नाते वाले के यहां बातों बातों में जिक्र चला सोशल मीडिया का तो कहने लगे जवानों ने धंधा बना रखा है 🤔 मेरे भी समझ नही आया जवानों ने कुछ देर बाद पता चला नोजवानों ने .....
(हम जवान उसके लिये उस जैसे ही जवान है नोजवानों का तो हुजूम उमड़ पड़ा है इन दिनों रैलियों में ... जवान तो अब भी शांत है )
बातें और बहुत हुई अभी के लिये ये देख लो समझ लो
पाकिस्तान हो या भारत पढ़े लिखे लोग 2017 में मिल जाएंगे जिन्हें सुकून और तररकी चाहिये एक ऐसी बेटी जिसके पास पिता न हो उसका दर्द हम नही समझ सकते वो अब किसी और बेटी को अपने पिता खोते नही देखना चाहती थी उसकी समझ में जो आया उसने कहा हम भी तो कहते है क्या हम गाली नही देते या फिर हम इतने शरिफ पैदा हुये की वो कुछ कहे तो पाप और हम कुछ कहे तो माफ़ । इस वीडियो को बार बार देख लीजिये राष्ट्रविरोधी नारे नही है
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हम मसला बना बम में तब्दील कर रहे है जो हमारे ही घर में ही विस्फोट कर रहा है ये समझना होगा हमें
ये वीडियो जो मैने शेयर किया है इस का अर्थ मेरे लिये सिर्फ इतना है हर मुसलमान और पकिस्तानी हमारी नफरत का शिकार न हो आतंकवाद का कोई धर्म नही है न ही देश बस ये कुछ हुकूमत के नुमाईंदे है जिन्हें समय समय पर हमारे बीच तैयार करकेे हिन्दू को मुस्लिम और मुस्लिम को हिन्दू से नफरत करने की वजह दे जाते है जो सदियो से होता आया है और होता रहेगा जब तक हम ये नही समझ लेते
पैदा वो भी औरत की कोख से हुआ है
मौत आने पर 2गज जमीन उसे भी चाहिये और मुझे भी रोने वाले उसकी मौत पर भी 4 होंगे और मेरी पर भी कंधे भी 4 ही होंगे इसके बाद के सारे कार्यक्रम हमारे बनाये हुए है
ऊपर कोई है तो उसने तो ज़िदगी और मौत का रास्ता एक ही दिया है ©
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