काबिल शब्द जो जहन में बचपन से है. माँ का दिया हो समाज का बनाया हुआ शब्द
इसके मायने सब के लिये अलग है लड़कियां खुद के लिये काबिल हो जाये तो शायद प्यार न रहे या फिर दर्द खत्म हो जाए क्योँ उन्हें " काबिल " चाहिये
फिल्म काबिल
ऋतिक रोशन हैं. साथ में यामी गौतम, रोहित रॉय, रोनित रॉय. संगीत युवाओं को रिझा नही पाया
ऋतिक रोशन (रोहन) अकेला लड़का जो देख नहीं सकता. वॉकिंग स्टिक के भरोसे चलता है. लेकिन बाकी सेन्स बहुत तेज़ काम करते हैं. जो देख नहीं सकते उनके बाकी सेंसेज़ और भी शार्प हो जाते हैं. यामी गौतम (सुप्रिया) रोहन से मिलती हैं
रोहन का दोस्त जो पहली दफा में ही सुप्रिया को भाभी बना लेता है साथ ही भाभी का कलर शेड भी जाया कर दिया गया है मुलाकात के बाद रोहन सुप्रिया डेटिंग में व्यस्त होते है डांस होता है प्यार होता है और शादी हो जाती है. साथ में रहने लगते हैं. ऋतिक की अंधे होने की एक्टिंग फिल्म से जोड़े रखती है
रोहन का दोस्त जो पहली दफा में ही सुप्रिया को भाभी बना लेता है साथ ही भाभी का कलर शेड भी जाया कर दिया गया है मुलाकात के बाद रोहन सुप्रिया डेटिंग में व्यस्त होते है डांस होता है प्यार होता है और शादी हो जाती है. साथ में रहने लगते हैं. ऋतिक की अंधे होने की एक्टिंग फिल्म से जोड़े रखती है
यामी की स्माइल मन के अन्दर एक अहसास जगाती है प्यार को आँखों की जरुरत नही अहसास खुदा की दुआ से प्यार को मजबूत कर ही देता है
...... एक फदू सा बक्सा जिसकी खुश बू ३ कालांतर में ही आनी शुरू हो जाती है जब 4 कालांतर के बाद जो बक्सा खुलना चाहिये वो चीख चीख के कह देता है माँ का दिये हुए आचार का तेल बह गया
मॉनिटर और हेडमास्टर खूब बिगड़े (नेता चमचे ) ने खूब सुनाया 5 वे कालांतर के बाद माँ के प्यार में अंधे हुए बालक ने खूब धोया और जनता मूक बधिर हो कर कुर्सी से उठने को तैयार थी पहले सब ने मिल के बच्चे की क्लास जो ले ली अनजाने में फिर क्या था बात माँ के प्यार की हो तो हीरो को आँख हो न हो तो भी वो सब की माँ की आँख करने को इस तरह निकला की इक के बाद इक को धो डाला और दर्शक दीर्घा का क्या है माँ की इज्जत गई तब भी लव byite पे ही अटकी थी प्यार की झपी की ख़ुशी का ठिकाना मर्दों को ही नही ओरतों को भी फुसफुसाने पे मजबूर कर देता है नजाने क्यों ... हम ऐसा अपनी निजी जिंदगी में रोज करते है ये तो सिनेमा घर है यहाँ की फुसफुसाहट यही सिम्ट कर रह जाती है
बहरहाल जिंदगी में तूफ़ान आता है (स्त्री के आँखे हो तब भी वो लाचार दिखाई जाती है यहाँ तो लाचारी आँखों की दे दी) जो किसी आम आदमी की जिंदगी में भी हो तो पुलिस प्रशासन अँधा कानून
( सब नोट बंदी के चलते और लालची हो गए )
पुलिस साथ नहीं देती है. रोहन खुद को मजबूती से बदला लेने के लिये तैयार करने को निकल पड़ता है. इतना तो ट्रेलर देख के ही समझ में आ गया था कि बदला रोहित और रोनित रॉय से लिया जा रहा था. रोहन को पुलिस के बीच kbc चल रहा है आप गलत समझ रहे है ये अमिताब का नही ऋतिक का शो है "कौन बनेगा चू.... " है जो बिना लाइफ लाइन के चल रहा है और अंत में ऋतिक ने बाजी मार ली बना दिया " खाकी खादी " की जम के ले ली और जनता इसे "लव बाइट " समझ बैठी⧭
ल ंच बॉक्स में माँ का प्यार घर का बना देशी आचार खाने वाले बच्चे ही कल काबिल हो कर खुद से ही न्याय कर लेंगे............
...... एक फदू सा बक्सा जिसकी खुश बू ३ कालांतर में ही आनी शुरू हो जाती है जब 4 कालांतर के बाद जो बक्सा खुलना चाहिये वो चीख चीख के कह देता है माँ का दिये हुए आचार का तेल बह गया
मॉनिटर और हेडमास्टर खूब बिगड़े (नेता चमचे ) ने खूब सुनाया 5 वे कालांतर के बाद माँ के प्यार में अंधे हुए बालक ने खूब धोया और जनता मूक बधिर हो कर कुर्सी से उठने को तैयार थी पहले सब ने मिल के बच्चे की क्लास जो ले ली अनजाने में फिर क्या था बात माँ के प्यार की हो तो हीरो को आँख हो न हो तो भी वो सब की माँ की आँख करने को इस तरह निकला की इक के बाद इक को धो डाला और दर्शक दीर्घा का क्या है माँ की इज्जत गई तब भी लव byite पे ही अटकी थी प्यार की झपी की ख़ुशी का ठिकाना मर्दों को ही नही ओरतों को भी फुसफुसाने पे मजबूर कर देता है नजाने क्यों ... हम ऐसा अपनी निजी जिंदगी में रोज करते है ये तो सिनेमा घर है यहाँ की फुसफुसाहट यही सिम्ट कर रह जाती है
बहरहाल जिंदगी में तूफ़ान आता है (स्त्री के आँखे हो तब भी वो लाचार दिखाई जाती है यहाँ तो लाचारी आँखों की दे दी) जो किसी आम आदमी की जिंदगी में भी हो तो पुलिस प्रशासन अँधा कानून
( सब नोट बंदी के चलते और लालची हो गए )
पुलिस साथ नहीं देती है. रोहन खुद को मजबूती से बदला लेने के लिये तैयार करने को निकल पड़ता है. इतना तो ट्रेलर देख के ही समझ में आ गया था कि बदला रोहित और रोनित रॉय से लिया जा रहा था. रोहन को पुलिस के बीच kbc चल रहा है आप गलत समझ रहे है ये अमिताब का नही ऋतिक का शो है "कौन बनेगा चू.... " है जो बिना लाइफ लाइन के चल रहा है और अंत में ऋतिक ने बाजी मार ली बना दिया " खाकी खादी " की जम के ले ली और जनता इसे "लव बाइट " समझ बैठी⧭
ल ंच बॉक्स में माँ का प्यार घर का बना देशी आचार खाने वाले बच्चे ही कल काबिल हो कर खुद से ही न्याय कर लेंगे............
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