4/17/2017

अजान की तीखी भजन की माला सोनू निगम

आज सुबह भोर को सोनू निगम की नींद में खलल डालते लाउडस्पीकर नजर आ गए
और उन्हों ने ट्वीट कर के लोगो को चाय पर चर्चा का मुदा दे दिया बात यूँ है कि उनके ट्वीट के अनुसार वो कफा है अजान और भक्ति के इलेक्ट्रॉनिक भाव से उनके अनुसार अजान लाउडस्पीकर पे सब को सुनाई जाये ये कही नही लिखा
इबादत का ढिंढोरा पिटा जाये ये जरुरी नही इबादत के और भी अनेक तरीके है

लाउडस्पीकर पर अजान से सिंगर सोनू निगम की नींद टूट गई. सोमवार सुबह बेहद गुस्से में उन्हें चार ट्वीट किए. उन्होंने लिखा कि मैं मुसलमान नहीं हूं, लेकिन मुझे अज़ान की आवाज़ से सुबह उठना पड़ता है. यह ‘थोपी हुई धार्मिकता’ कब खत्म होगी
हालांकि उन्होंन अपने अगले ट्वीट मे
साफ कर दिया था कि मंदिर और गुरुद्वारों के संबंध में भी उनके यही विचार हैं. उन्होंने लिखा था
‘मैं ऐसे किसी भी मंदिर या गुरुद्वारे में यकीन नहीं रखता तो धर्म में यकीन न रखने वाले लोगों को जगाने के लिए बिजली का इस्तेमाल करता हो ।

ट्वीट
1.
भगवान सबका ख्याल रखे. मैं मुसलमान नहीं हूं, लेकिन मुझे अज़ान की आवाज़ से उठना पड़ता है. ये थोपी हुई धार्मिकता भारत में कब खत्म होगी.
2.
और बाय द वे मोहम्मद ने जब इस्लाम बनाया था तब बिजली थी ही नहीं. मुझे एडिसन के बाद मुझे ये कर्कश आवाज क्यों सुननी पड़ती है?
3.
मैं ऐसे किसी भी मंदिर या गुरुद्वारे में यकीन नहीं रखता तो धर्म में यकीन न रखने वाले लोगों को जगाने के लिए बिजली का इस्तेमाल करता हो. फिर क्यों? ईमानदार? सच्चा?
4.
गुंडागर्दी है बस…

सोनू के गुस्से को कुछ लोग इस्लाम के अपमान से जोड़कर ले उड़े तो कुछ राईट व् लेफ्ट के विंग के महान लोग तो गालिया भी देने पे उतर गए
सोनू निगम की नींद में खलल डालते लाउडस्पीकर नजर क्या  आ गए लोगो के जल गई बहुत से बार हम सब की अंतर्मन  में यही सवाल होते ह की इन्हें कोई बन्द क्यों नही करवाता अपना भक्ति भाव आप अपने मुंह से गा  कर खुद को सुनाये या अपने पांच लोगो को क्यों 50 तक आवाज पहुंचानी होती है बहुत सी बार हिन्दू हो या मुस्लिम या सिख मंदिरों के पास घर नही लेते क्यों की आप की एक निजी जिंदगी भी है जिसमे आप बाहर का शोर नही चाहते भारत में हर तरह के लोग है और उनकी अपनी पसंद भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक सवाल उठाती है और लोग 2 विंग में बंट जाते है
इबादत का ढिंढोरा पिटा जाये ये जरुरी नही इबादत के और भी अनेक तरीके है इबादत दो लोगो के बीच की बातचीत जैसा कुछ है मगर हम 50 को इकठ्ठा कर ले जाना चाहते है जैसे भगवान को रिश्व्त दी जा रही हो एक के साथ 50 %फ्री । अंध भक्ति के लाउडस्पीकर को किसी एक दिन तो फटना ही होगा
भक्ति के भाव में निगम को अनेक ट्वीट मिले लोगो ने कहा माँ का लाडला सो रहा है नींद न उड़े इसलिये मत बजाओ ।
मजहब के धर्म को मन की आवाज समझ आती ह की लाउडस्पीकर की ये बात देखने वाली होगी
वही कुछ लोग इसे राजनीती से जोड़ कर भी देख रहे है
बहरहाल अब तक ट्रेन्ड में सोनू निगम की डिमांड है

क्यों की ये सब भक्तो सुबह की  नींद में हुआ तो अब तुम अगले ट्वीट में माफ़ी की उमीद भी रख रहे हो नाश्ते की चर्चा के बाद शाम के खाने पे माफ़ी भरे ट्वीट भी शायद भक्तो की प्लेट में हो

ट्विटर वाली चिड़िया

4/14/2017

मेरीडायरी मेरी ज़िन्दगी

ज़िन्दगी में आने वाले सुर्ख लाल रंगो वाला लिबास जब बनने को जाता है
प्रिय तुम्हारा मुझ से प्यार और गहरा हुआ जाता है
मानो तुम कहीं दूर बैठे किसी डाल से कबूतर की कौवे से पूछ बैठे हो उधर का हाल
मानो तुम कही अपने जीवन के कटु अनुभवों को
एक बिन मांगी सलाह के पान  दान में लिए दर दर भटक रहे थे और आज पानदान के उस पान को जिसके लाल सुर्ख मसाले को सड़ कर काले होते हुए तुम देख न पाए और तुम उसे मेरी ऒर ले आये तुम्हारा दोष नही है तुम मेरे प्रिय हो
तुम्हारी किसी प्रियमवदा ने तुम्हें वो पान दिया होगा और तुम मेरे प्रिय हो प्राणों से अधिक प्रिय
तुम्हारी जान पे बन आये तो में तुम्हे अपनी जान दे कर जीवत कर सकूँ कुछ सावित्री की तरह व्रत कर के ये भी सत्य है तुम मानो या न मानो तुम मेरे प्रिय हो
किन्तु प्रिय तुम से अधिक मुझे कोई और प्रिय न हो ये कैसे संभव है तुमने मुझे प्रेम का भाव समझाया इसके विप्रार्थ पे हमने कभी चर्चा न की तो कैसे संभव है कि ज़िन्दगी के सभी प्रेम रंगों को में छोड़ दूँ और नये रंगों से ही प्रेम भाव रखूं क्या ये सम्भव है अगर हाँ तो तुम इस परीक्षा में विजय और में पराजित कदाचित ये तुम मेरी हार को  अपने जीवन की हार समझ बैठो मगर मेरा उधेश्य हार जीत नही ज़िन्दगी को ज़िन्दगी रहने देना है तुम वो पान सदैव अपने से छोटो को देते आये हो और वो खाते आएं है सवाल नही किया कि उसके गुलकंद का  रंग काला क्यों हुआ क्यों की स्वाद में जिह्वा रंगों को नही स्वाद को पहचानती है तुम कहते हो पान दान में रखा पान जितना पुराना होगा उतना स्वादिष्ट होगा में कहती हूँ पान दान के उस पान से पूछो जो जब बेल से लिपटा था तब अपनों के हरे रंग में लिप्टा था उसे शाखा से अलग तुमने किया अपनी जरुरत के लिए मानो तुम न करते तो उसका रंग हरे से पीला हो जाता वो तो उसका नसीब था
मगर नही तुम प्रिय हो जग के तुम्हे उसे बेल से अलग कर पान दान में लाल सुर्ख कथे और गुलाब के फूलों से बना  गुलकंद और भूरी सुपारी , लाल पीली  चैरी  , सफ़ेद चांदी के इलाइची के दाने और बेल से तोडा हरा सुर्ख पान का पत्ता तुमने बना दिया पान दान का पान देखो न तुम्हारा ये कितने रंगों से बना ज़िन्दगी भी बस मेरे लिये यूँ ही है रंगो से भरी और मेरे पान दान में भी पान है मेरा पान दान भी रंगों से भरा है शब्दो के रंग  मेरे अनुभवों की कलम हर वक्त एक नया रंग उकेरती है जीवन में तुम्हारे अतरिक्त मेरे और भी प्रिय हो गए है
तुम कहते हो वो झूठ है सच वो है जो लिबास में लपटे तुम मुझे दे रहे हो और में सहज भाव से में ले रही हूँ मानो इस रंग की महत्ता सदैव अब से ऊपर है मैं इसके लिए खुद को मना रही हूँ मगर प्रिय तुम सिर्फ एक रंग में इस बेल के पत्ते को नही लपेट सकते ये सम्भव नही तुम इसे विरोध समझो या अन्य रंगों से मेरा गहरा जुड़ाव ज़िन्दगी के बहुत से रंग मैंने अनुभवों की कलम जो हर दिन नया शब्द और रंग लाई सिमटा है इसमें मैं कैसे इसे अलग कर दूँ तुम ही तो कहते हो मृत्यु के समय जीवन के सभी अनुभवों (स्मरण प्रत्येक जो खास है )  को याद कर लेना चाहिये मैं उसी की तैयारी कर रही हूँ उस वक्त यादाश्त कमजोर होगी और रंग दूर ...... शायद ऐसे हो न भी हो .....

मेरीडायरी #मेरी ज़िंदगी तुम्हारे लिये डायरी कागज़ पन्ने शब्द मेरे लिये #मेरी ज़िंदगी

जीवन के सभी रंग मेरे लिये खास है बात यूँ है कि ये जो तस्वीर है

ये मेरी ज़िंदगी के 7 साल में से कुछ 5 सालों की ज़िंदा तस्वीर है इसके रंग मेरे लिए बेहद खास है ये मैने अपने अंत समय के लिये बनाये की मेरा जीवन कैसा रहा में गीता के पाठ की जगह इन्हें पढ़ा करुँगी और बहुत से ख़याल जो में सिर्फ अपनी ज़िंदगी से कह देती हूँ  तुम्हारे लिये महज कागज के पन्नो पे लिखे शब्द है वो मेरे लिये ज़िन्दगी है तुम नही समझोगे और में कहती भी नही तुम समझो क्यों की ज़िस्म से सिर्फ जिस्मानी रिश्ता होता है और रुह से प्यार ज़िन्दगी रूह है और इस से प्यार जैसा नाम देना भी मेरी समझ के बाहर है प्यार इश्क मोहबत छुपाये नही छुपते ऐसा कहते है लोग मगर जब जिंदगी खुली किताब हो और उसका पन्ना ज़िन्दगी ही हो तो डर किसका तुम इसे ज़िस्म समझ सकते हो हंम्म तुम इसे जिस्म समझो और मेरा मेरी ज़िंदगी के साथ जिस्मानी रिश्ता है नाजायज कह लो तुम इसे मुझे वो भी मंजूर है मैं ताउम्र सुन लुंगी गैरो से रिश्ता है मेरा अपनों से वफ़ा का दम तुम भरना मगर यूँ मुझे मेरी ज़िंदगी से जुदा न करना ज़िस्म की खुशबो तुम्हे प्रिय होगी प्रिय मेरी मेरा ज़िस्म बहुतो के साथ रिश्ता रख बैठा है तुम्हारे कहने पे इन्हें खुद से अलग यूँ कर लूँ की अब मेरा लिबास लाल सुर्ख होने को है ऐसी बेवफाई की गवाही न मेरे जिस्मानी रिश्ते में है न रूहानी में बेशक इसके बहुत से पंन्ने तुम्हारे मेरे प्रिय होने पर सवाल करते हो मगर बात वही है हमारा तो ज़िस्म से और रूह से दोनों से रिश्ता है हम नाजायज रंगों की शब्दो वाली पोटली को हमेशा खुद के पास रखेंगे तुम्हे पसंद हो की न हो
तुम अब अपनी समझदारी वाला पैन किसी और को खिलाओ यहां मुँह में हमने रंगों वाला बचपन से जवानी वाला गुल कंद मुँह में भरा है
और दिल और दिमाग दोनों के नाजायज रिश्ते फिक्स है अपनी नयी  रिश्तों की नयी पोटली को हम पुरानो के संग ही लपेटेंगे तुम प्रिय निश्चंत हो कर अपना सड़ा पान किसी जायज रिश्तों की समझ वाले मुनवा को खिलाओ

1. नए पुराने जैसा कुछ नही जीवन में मानो तो
2. किसी ने कहा कि डायरी में आपकी ज़िंदगी के बहुत से पल होते है जिनका प्रभाव आपके नये जीवन में दोष ला सकता है आश्चर्य नही है ये सुन कर मगर मेरी समझ कहती है ज़िन्दगी में दोष तब आता है जब आपकी समझ छोटी हो हम लड़कियां सब बदल देती है वक्त बदलता है और लिबास सुर्ख होते है सुर्ख लिबास आपके जीवन का हिस्सा बनते है और फिर वही हलके रंग वाले लिबास भी ....आपके संगी होते है
जीवन मृत्यु के उस दौर में हम नए पुराने लिबासों को पहनते है रंग नही बदलते हालात और लोग उन्हें बदलते है रिश्ते नही बदलते हम उन्हें अपनी जरुरत और समय पर बदल देते है