हत्या और आत्महत्या
मेरी समझ में हत्यारे का जो भी नाम हो वो हत्या करते समय खून का प्यासा होता है हत्यारे का मुख्य लक्ष्य सिर्फ मारना है हत्या का दोषी तो वो हो गया जो खून का प्यासा है
अब आत्महत्या का श्रेय किसको दिया जाये
मौत (आत्महत्या ) एक किस्म की कायरता है अपनी ही आत्मा का गला घोट देना कुछ इस तरह है की खुद को समझ ना पाना
आत्महत्या की और बढ़ते हुए कदम हमारी कमजोरी का एक आयाम है दुनिया समाज और परिवार से प्रेम की उम्मीद और खुद से प्रेम ना करने की गलती करने वाले में और
आदम में इसकी प्रबलता अधिक होती है जो की समाज के लिये और स्वयं के लिये घातक है
मेरी नजर में अगर मैं खुद से क्षणिक मात्र भी प्रेम नही करती तो ऐसा करने की स्थिती अधिक होगी
मैं आज के समाज की एक प्रबल नारी हूँ आत्मह्त्या करने की सोच को खुद पे हावी होने देना मेरे नारी होने पर व् प्रबलता पर एक सवाल है ? (नारी जो जननी है पालन हारी है )
आत्महत्या का श्रेय मैं सिर्फ खुद को दूंगी इसकी बहुत सी वजह है मेरे पास 1 . इस बात का ख्याल आया भी क्यूँ ? कोई व्यक्ति, वस्तु , सवांद ,या परिस्थिति ? इन सब से मैं खुद को दूर न रख सकूं तो ये मेरी गलती है इन सब को खुद पर हावी होने देना मेरी दूसरी बड़ी गलती है खुद को न समझ पाना और किसी पर निर्भर होना तीसरी बड़ी गलती ( प्यार ,दोस्ती ,रिश्ते ,भगवान ,नौकरी ,पैसा ,सपने और अपने ) ज़िंदगी को जीने के लिये खुद को समझाना जरुरी है और किसी को भी अपनी ज़िंदगी में इतना भी हावी न होने दो की वो आपकी हत्या कर जाए और लोग उसे आत्महत्या समझ बैठे।
जिस तरह से हत्यारा खून का प्यासा है उसी तरह मैँ जिन्हे खुद पे हावी होने दे रही हूँ वो मेरी खूबसूरत ज़िंदगी के प्यासे हैं
हत्यारे से लड़ा जा सकता है जैसे मेरी जिंदगी मेरा घर है (यहाँ इन शब्दों का अर्थ मेरी आत्मा से है ) और मुझे कोई मारने मेरे घर आ गया है मेरे घर में कुछ तो होगा ही मुकाबला करने के लिये , उस हत्यारे से , मुझे खुद को बचाना है तो डर नही एक चमक चाहिये अपनी आँखों में जिस से वो भी डरे और मुझ में भी उसके चाकू छुरी (प्यार ,दोस्ती ,रिश्ते ,भगवान ,नौकरी ,पैसा ,सपने और अपने ) का पलट वार करने के लिये एक तलवार हो जो कहे की
मैं वो नही जो आदम से प्यार करती हूँ
मैं तो वो हूँ जो खुद से प्यार करती हूँ
मैं तो वो हूँ जिसने तुझे बनाया है
मैं वो भी हूँ जिसने खुद को बनाया है
मैं तो वो हूँ जो खुद से प्यार करती हूँ
आत्महत्या का दोषी किसी को भी खुद पे हावी होने देने वाला समय
वो पल वो रात वो दिन .मिनट सेकंड वो महिना वो साल जब मैंने इसके बारे ख्याल भी किया वो वक्त जो
कभी आया नही हकीकत में मगर जो कभी सपनो में तो कभी निराशा के भाव रूपी शब्दों कभी कबार देखा जाता है जरुरी है मेरे लिये ये की मैं समझ लूँ और अधिक
मैं वो नही जो आदम से प्यार करती हूँ
मैं तो वो हूँ जो खुद से प्यार करती हूँ
( भारतीय दण्ड संहिता के धारा 309 ) के तहत आत्महत्या एक अपराध है और मैं भारतीय काननू की अवहेलना करना भी अपराध समझती हूँ मेरी अपनी जिंदगी अपनी नही है मेरे भारत , मेरे समाज के लिये है
इस सवरूप आत्महत्या न सिर्फ कानून रूप से गलत है वरन में समाज के अहित में भी ऐसा कर रही हूँ
मेरी अपने एक पहचान है और इसे मुझे कायम रखने के लिये मानसिक रूप से खुद को प्रबल करना होगा तभी मैं समाज में एक अच्छे नागरीक होने की मांग कर सकती हूँ
प्रेम प्रसंगों में भारत में मौत की संख्या अधिक है इसकी एक वजह psychological test से अनुमानित है " खुद को दोषी समझना और इन परिस्थितियों में खुद को असहज रूप से पाना "
इसका मुख्य कारण " खुद से प्रेम न करना " दुसरो को अधिक महत्व देना भी है !
मेरी समझ में हत्यारे का जो भी नाम हो वो हत्या करते समय खून का प्यासा होता है हत्यारे का मुख्य लक्ष्य सिर्फ मारना है हत्या का दोषी तो वो हो गया जो खून का प्यासा है
अब आत्महत्या का श्रेय किसको दिया जाये
मौत (आत्महत्या ) एक किस्म की कायरता है अपनी ही आत्मा का गला घोट देना कुछ इस तरह है की खुद को समझ ना पाना
आत्महत्या की और बढ़ते हुए कदम हमारी कमजोरी का एक आयाम है दुनिया समाज और परिवार से प्रेम की उम्मीद और खुद से प्रेम ना करने की गलती करने वाले में और
आदम में इसकी प्रबलता अधिक होती है जो की समाज के लिये और स्वयं के लिये घातक है
मेरी नजर में अगर मैं खुद से क्षणिक मात्र भी प्रेम नही करती तो ऐसा करने की स्थिती अधिक होगी
मैं आज के समाज की एक प्रबल नारी हूँ आत्मह्त्या करने की सोच को खुद पे हावी होने देना मेरे नारी होने पर व् प्रबलता पर एक सवाल है ? (नारी जो जननी है पालन हारी है )
आत्महत्या का श्रेय मैं सिर्फ खुद को दूंगी इसकी बहुत सी वजह है मेरे पास 1 . इस बात का ख्याल आया भी क्यूँ ? कोई व्यक्ति, वस्तु , सवांद ,या परिस्थिति ? इन सब से मैं खुद को दूर न रख सकूं तो ये मेरी गलती है इन सब को खुद पर हावी होने देना मेरी दूसरी बड़ी गलती है खुद को न समझ पाना और किसी पर निर्भर होना तीसरी बड़ी गलती ( प्यार ,दोस्ती ,रिश्ते ,भगवान ,नौकरी ,पैसा ,सपने और अपने ) ज़िंदगी को जीने के लिये खुद को समझाना जरुरी है और किसी को भी अपनी ज़िंदगी में इतना भी हावी न होने दो की वो आपकी हत्या कर जाए और लोग उसे आत्महत्या समझ बैठे।
जिस तरह से हत्यारा खून का प्यासा है उसी तरह मैँ जिन्हे खुद पे हावी होने दे रही हूँ वो मेरी खूबसूरत ज़िंदगी के प्यासे हैं
हत्यारे से लड़ा जा सकता है जैसे मेरी जिंदगी मेरा घर है (यहाँ इन शब्दों का अर्थ मेरी आत्मा से है ) और मुझे कोई मारने मेरे घर आ गया है मेरे घर में कुछ तो होगा ही मुकाबला करने के लिये , उस हत्यारे से , मुझे खुद को बचाना है तो डर नही एक चमक चाहिये अपनी आँखों में जिस से वो भी डरे और मुझ में भी उसके चाकू छुरी (प्यार ,दोस्ती ,रिश्ते ,भगवान ,नौकरी ,पैसा ,सपने और अपने ) का पलट वार करने के लिये एक तलवार हो जो कहे की
मैं वो नही जो आदम से प्यार करती हूँ
मैं तो वो हूँ जो खुद से प्यार करती हूँ
मैं तो वो हूँ जिसने तुझे बनाया है
मैं वो भी हूँ जिसने खुद को बनाया है
मैं तो वो हूँ जो खुद से प्यार करती हूँ
आत्महत्या का दोषी किसी को भी खुद पे हावी होने देने वाला समय
वो पल वो रात वो दिन .मिनट सेकंड वो महिना वो साल जब मैंने इसके बारे ख्याल भी किया वो वक्त जो
कभी आया नही हकीकत में मगर जो कभी सपनो में तो कभी निराशा के भाव रूपी शब्दों कभी कबार देखा जाता है जरुरी है मेरे लिये ये की मैं समझ लूँ और अधिक
मैं वो नही जो आदम से प्यार करती हूँ
मैं तो वो हूँ जो खुद से प्यार करती हूँ
( भारतीय दण्ड संहिता के धारा 309 ) के तहत आत्महत्या एक अपराध है और मैं भारतीय काननू की अवहेलना करना भी अपराध समझती हूँ मेरी अपनी जिंदगी अपनी नही है मेरे भारत , मेरे समाज के लिये है
इस सवरूप आत्महत्या न सिर्फ कानून रूप से गलत है वरन में समाज के अहित में भी ऐसा कर रही हूँ
मेरी अपने एक पहचान है और इसे मुझे कायम रखने के लिये मानसिक रूप से खुद को प्रबल करना होगा तभी मैं समाज में एक अच्छे नागरीक होने की मांग कर सकती हूँ
प्रेम प्रसंगों में भारत में मौत की संख्या अधिक है इसकी एक वजह psychological test से अनुमानित है " खुद को दोषी समझना और इन परिस्थितियों में खुद को असहज रूप से पाना "
इसका मुख्य कारण " खुद से प्रेम न करना " दुसरो को अधिक महत्व देना भी है !