रात की ख़ामोशी आई..!!
इस रात ने पूछा उदास हम है या तुम हो हमने कहा
हम तो सखी है ! खामोश हो फिर से रात की ख़ामोशी आई..!
क्या कहूँ तुम चाँद से किसी की तारीफ करती हो
रात की ख़ामोशी आई..!!
हम तुम तो ऐसा अक्सर करते है रात की ख़ामोशी आई..!!
चाँद इतना जलता है की सूरज बन जाता है
रात की ख़ामोशी आई..!! हम तो सखी है !
तो क्या अब हम सूरज से किसी की तरीफ करें ! रात की ख़ामोशी आई..!!
इस रात ने पूछा उदास हम है या तुम हो हमने कहा
हम तो सखी है ! खामोश हो फिर से रात की ख़ामोशी आई..!
क्या कहूँ तुम चाँद से किसी की तारीफ करती हो
रात की ख़ामोशी आई..!!
हम तुम तो ऐसा अक्सर करते है रात की ख़ामोशी आई..!!
चाँद इतना जलता है की सूरज बन जाता है
रात की ख़ामोशी आई..!! हम तो सखी है !
तो क्या अब हम सूरज से किसी की तरीफ करें ! रात की ख़ामोशी आई..!!
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